विभिन्न भाषाओं में नाम :
| हिंदी | अरिमेद, दुर्गन्ध खैर, बैलायती कीकर |
| संस्कृत | इरिमेद, विट्खदिर, कालस्कन्द, अरिमेदक |
| मराठी | हीवर, गन्ध हीवर, शेष्याखैर |
| बंगला | गुयेबावला, बिट्खैर |
| गुजराती | तालवावड़, झेरीबार, जन्माबाल |
| अंग्रेजी | दि केसिया फ्लावर |
| लैटिन | अकेसिया फार्नेसियाना |
गुण :
अरिमेद का रस कषैला और कडुवा, प्रकृति में गर्म, ग्राही तथा भूत-प्रेत की बाधा को दूर करने वाला होता है। यह मुंह के रोग, दांतों के रोग, रक्तविकार, बस्तिरोग (नाभि के निचले हिस्से की सूजन), अतिसार, विषम ज्वर (टायफाइड), सूजन, खुजली, विषविकार, कफ, खांसी, पेट के कीडे़, सफेद दाग, फुंसियां और जहरीले घावों को नष्ट करता है। ये सभी गुण इसकी छाल में पाये जाते हैं।
